NAKSH KE AKESAM नक्श के अक़साम

नक्श के अक़साम

 नक्श दो किस्मके होते है. 1. तबई.  2वजई
1.तबई नक्शवह होता हैजिसमे आदाद तबईहो . एक सेशुरू होकर कुलखानों की तादाद  काअदद आख़िर हो     मसलन मसलस तबईवह होगी जिसमेएक से नोहिंदसे हों औरमीज़ान हेर तरफसे इसकी पन्द्रहहों .
2.वजई नक्श वह होताहै जो किसीइस्म या आयतया अज़ीमत केआदाद की जमालेकर मकसद केमुताबिक     नक्श भराजाये .इसमें तादादतबई से ज्यादाहोंगी .
 

ताविजात के अक़साम

ताविजात चार किस्मकी होती हैं. 1. आतिशी , 2. बादी , 3. ख़ाकी, 4. आबी.
1.आतिशी :-   मसलसकी सिम्त शरकीहै ,मिज़ाज आतिशीहै ,ये तावीज़बराऐ हलाकत , बीमारकरना , खराबी वे तबाहीऔर तफ़रक़ा मेंकाम देती है  इसलिएजब भी ऐसामक़सद हों आतिशीसे नक्श पुरकिया जाता है  औरमुंह मशरिक  की तरफरखा जाता है.
मसलन ये तावीज़
2. बादी :-   मसलसकी सिम्त मग़रिबसे  तअल्लुक़रखती हैं . मिज़ाज़इसका बादी हैं. बराऐ फतूहात हाजात,      तरक्की  दरजातवगैरह के लिएये किया जाताहैं . इसके लिखतेवक़्त मुंह मग़रिब  कीसिम्त किया जाताहै.
3.ख़ाकी :-  ख़ाकीकी सिम्त जुनूबसे मुतअल्लिक़ है. मिज़ाज़ इसका ख़ाकीहै . बराऐ ख़रूज  ज़बानख़्वाब बंदी , दिलबन्दीगोशबन्दी , सुख़न बन्दी, सहार वे जादूको दूर करनाकिसी अमर कीकायमी हुसूल  के लिएइसके पुर करतेहैं  और  मुंहजुनूब की तरफरखते हैं .
4.आबी :-   आबीमसलस शमाल सेमुतअल्लिक़  हैं. मिज़ाज़ इसका आबीहैं . बराऐ मुहब्बत  , शिफयेअमराज , दर्द  जदा, कजाये हाजात के लिएइसको पुर करतेहैं . लिखते वक़्तमुंह  शमालकी तरफ होनाचाहिए .

                      एहतियात:

ये लाज़िम है किऐसा दिन इन्तेख़ाबकिया जाये किरजालुल गेयब से पड़े हुकमाने इसके एकमसलस कि शक्लदेकर बलिहाज अनासिरखानों को  बयान कियाहै .

 नक़ूश को इस्तेमाल करने का तरीका 

 
1.    अगर नक़्श खाकी है .कोई  खख़्स इसका इस्तेमाल करना चाहे तो पहले इसकी ज़कात अदा करे. अगर किसी नेक मकसद के लिए हो नक़्श के आदाद पाक जमीन पर या पाक रेत पर उंगली से लिखें और मिटायें. हेर रोज ऐसा ही करें या काग़ज़ पर लिखकर जारी पानी में डालें. नक़्श खाकी को पानी में डालने पर कोई मजायका नहीं है.
2.    अगर नक़्श आबी है और कोई शख़्स चाहे कि उसकी ज़कात करें या किसी नेक काम के लिए अमल करें तो नक़्श लिखकर आब रवां में डालें. अगर हब के लिए हो तो पिलाना चाहिए या इस नक़्श को पानी के बर्तन के नीचे रखे.
3.    अगर नक़्श बादी हो और अमल अदावत के लिए हो खारदार दरख़्त मिस्ल नीम के ऊपर लटकाते है. अगर हब के लिए हो तो मैवा या किसी मीठे फल के दरख़्त पर लटकाते है ताकि हवा से मिलता रहे.अगर अमल सरगरदानी दुशमन के लिए है तो नुकूश को सहरा मे किसी बुलन्द जगह पर जाकर उड़ाते है.
4.    अगर नक़्श आतिशी है और अगर कोई हाजत दरकार हो तो इसे आग में डालते हैं.

नक़्श भरने के उसूल

1.नक़्श भरने से पहले नहाकर कपड़ें बदल लें. दर्मियान नमाज इशराक और चाश्त आसमान के साये में नंगे सर भरें. किसी इंसान का साया न पड़े न किसी से बात चित करें. अगरबत्ती और लौबान सुलगाये. ज़मीन पाक हो क़िब्ला रुख़ दोजानु बैठ केर भरें. अव्वल व् आखिर तीन  तीन  बार दुरुद शरीफ पढ़कर नक़्श पर दम केर दें. इसको बांध लें . नक़्श को मुश्फ व् जाफरान और गुलाब की रोशनाई से भरें.नक़्श सिर्फ नौचन्दी जुमेरात या इसकी सुबह को जुमा के दिन लिख सकते हैं.किसी दूसरे दिन नहीं लिख सकते हैं तावीज़ मुकम्मल बाज़ू पर बांधे इसमें बकसरत से इतर लगाया करें.
    परहेज :- तावीज़ बांधे हुए औरत की सूरी जच्चा खाना में न जायें और न मुर्दे को छुए और न औरत के साथ खुलूत वरना असर ख़त्म हो जायेगा.
2.मसलस में 12 से तरह देकर सलस से भरना चाहिए. अगर एक कसर हो तो ख़ाना 7 दो हो तो ख़ाना 4 में इज़ाफ़ा किया जायें.
  
      मुरबअ में तीस से तरह देकर रबअ से भरना चाहिए. अगर एक कसर हो तो ख़ाना 13 में. दो हो तो ख़ाना 9 में और तीन हो तो ख़ाना 5 में एक एक अदद इज़ाफ़ा करें.
      मख़मस में साठ से तरह देकर खम्स से भरना चाहिए.एक कसर हो तो ख़ाना 21 दो हो तो  ख़ाना 16 में तीन हो तो 11 चार हो तो छठे ख़ाना में इज़ाफ़ा करके नक़्श पूरा करें और अशआर इन सभों की इस तरह हैं.
 दो असप प्यादा व् दो फरजैन
  अज गाह प्यादा व् दो अस्प अस्त
   

 हुरूफ़े तहज्जी के आदाद

 
ऊपर बयान किया गया हैं कि अल्लाह  तआला के नाम या किसी दुआ से नक्य पुर करते वक़्त इसके आदाद बहिसाब अबजद निकालें जायें. हुरूफ़े तहज्जी के मुक़रर्रा हुरूफ़ व आदाद मन्दर्जा जैल हैं.
 
                                      
मसलन किसी शख़्स को  इस्म पढ़ना हैं या इसका नक़्श पुर करना हैं तो बहिसाब अबजद आदाद इस तरह हासिल किये जायें.

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