Apne Pyar Ko Hasil Karne Ka Wazifa अपने प्यार को हासिल करने का वज़ीफ़ा

Apne Pyar Ko Hasil Karne Ka Wazifa,”अपने प्यार को हासिल करने के लिए बरोज जुमा बाद नमाज़ फज़्र अव्वल व आखिर ग्यारह  ग्यारह  बार दुरुद शरीफ़ दर्मियान में सूरे  इजा  जा अ मअ  हर बार बिस्मिल्लाह के एक सौ एक बार उम्दा इत्र हिना पर शुरू माह के अव्वल जुमा को पढ़कर दम करके लगा कर मतलूब  के पास जायें फरिफता हो जायेगा.
   दीगर:- यह जवाल के अव्वल इतवार को अव्वल दुरुद शरीफ़ के साथ एक सौ एक बार सूरे इज़ाफ़ा अ पढ़कर उम्दा शीरीनी पर दम करके किसी तरह से मतलूब कको खिलायें मतीअ व फ़रमाबरदार होगा. और बीच में इसको बाद नमाज़ पढ़ना होगा और ये कहना होगा कि अल्लाह पाक अपने कलाम कि बरकत से फ़ंला बिन फलां या बिन्त फलां को मतीअ कर दे. आमीन सुम्मा आमीन बजाहुल मुरसलीन.

   दीगर:- हस्बे औक़ात हर माह कि ग्यारहवीं तारीख़ को मिठाई उम्दा मंगा कर हजरत बड़े पीर साहिब को फ़ातिहा दे और उनसे इल्तिजा करे कि फ़लां बिन फ़लां के क़ल्ब में मेरी उल्फ़त पैदा हो जायें. और मेरे हाल पर कर्म फ़रमाये तवज्जे हो जायें कि मेरा फ़लां मक़सद बर आ हो जायें और इस वक़्त तक हर माह कि ग्यारवीं को नज़र देते रहें कि जब तक मक़सद में कामयाब न हो जायें.

वास्ते मुहब्बत कि ये नक़्श लिखकर मोम जमा करके बाज़ू पर बांधे नक़्श यह है-
   बराऐ हुब अकसीर है. इस नक़्श को मुर्ग़ी के अण्डे पर लिखकर मतलूब के मकान में दफ़न कर दें.इन्शा अल्लाह कामिल असर होगा. नक़्श यह है-
   हुब के लिए आयतुल कुर्सी मअ ज़कात ये कि इशा के फ़र्ज़ व सुन्नत पढ़कर क़ब्ल वीतर दोनों जानू बैठकर 41 बार आयतुल कुर्सी बनियत हुब पढ़े अव्वल व आखिर ग्यारह ग्यारह बार दुरुद शरीफ़ इस तरह चालीस रोज़ करें और सुबह कि सुन्नत पढ़कर ग्यारह बार आयतुल कुर्सी अव्वल व आखिर दुरुद शरीफ़ ज़कात अदा हो जायगी. इस इस दर्मियान खुदा चाहे तो आतिश मुहब्बत मतलूब के दिल में भड़क उठेगी. अगर इस दर्मियान ग्यारह बार मअ दुरुद शरीफ़ को पढ़ा करें इन्शा अल्लाह 21 रोज़ में मतलूब हाजिर होगा. मगर तसव्वुर के साथ पढ़के मतलूब कि जानिब फूंक दिया करें. मुजर्रब है.
इस नक़्श को घोल कर पिलायें मुहब्बत होगी कोई दिन तारीख़ मुक़र्रर नहीं है.

बराऐ हुब

   कई बार का तजुर्बा किया हुआ. उरूज माह में इतवार के रोज़ तुलूअ आफ़ताब के वक़्त लिखा जायें –

बराऐ हुब

   अव्वल व आखिर ग्यारह ग्यारह बार दुरुद शरीफ़ दर्मियान 91 मर्तबा एक हफ़्तेतक मुश्क पर दम करें दूसरे हफ़्ते एक चावल पान में रखकर खाये और मतलूब से बात करें.

दीगर बराऐ हुब

एक आमिल को देखा कि इस नक़्श को लिखकर परिन्दे का नाम लिखकर दरख़्त पर बांध देते थे. तो परिंदे वहां जमा होते थे डराने से भी नहीं भागते थे असर अमल करने से होता है. जब नक़्श का ज़कात अदा किया जायें ताहम बग़ैर ज़कात के भी काम देता है. तरकीब ये है कि जिस दिंन चाँद देखे इसी रत से यानि पहली रात से ज़ाफ़रान से 52 नक़्श पुर करें और बख़ूर सुलग़ाये बातहारत क़िब्ला रुख़ होकर लिखें फिर दूसरी शब एक ज्यादा लिखें यानि 53 तीसरी शब 54 चौथी शब 55 पांचवी शब 56 छठी शब को 57 आठवीं शब को 59 और नवीं शब को 60 नक़्श लिखें. इन्शा अल्लाह इस दर्मियान में मतलूब हाजिर हो जायेगा.
खुदा नख़्वास्ता अगर खास असर न हुआ तो जिस तरतीब से आपने नक़्श लिखा है इसी तरतीब से तमाम नक़्श कि बत्ती बनाकर रोगन चमेली में तर करके जला दें बत्ती का मुँह मतलूब कि तरफ हो जब तक बत्ती जलती रहे अप्प इसे देखते रहें और तसव्वुर मतलूब का हो कि मतलूब का दिल मेरे इश्क़ में जल रहा है. ये खूब याद रहें कि नवीं शब में 60 नक़्श लिखा है मतलब नहीं हासिल हुआ तो दसवीं शब 52 नक़्शो का फ़लिता बनाकर रोशन करें दूसरे में 53 नक़्श का तीसरी शब में 54 नक़्श का इसी तरतीब से जलायें. जलाते वक़्त या नक़्श लिखते वक़्त वहां कोई दूसरा आदमी न हो. नक़्श लिखने का वक़्त सूरज ग़ुरूब होने के बाद से 12 बजे तक है.
नक़्श मुबारकां ये है-

नक़्श

दीगर बराऐ हुब

दीगर

   अगर कोई शख़्स जायज मुहब्बत के लिए मुअस्सर अमल चाहता हो तो सात रोज़ तक रोज़ा रखे दूध और चावल से अफतार करें. नमकीन चीज़ न रखे और एक लाख सत्तर हजार मर्तबा लफज पढ़े. और अव्वल व आखिर हर रोज़ सात सात मर्तबा बहुरमत युसूफ अले0 पढ़ लिया करें. सातवें दिन मिस्री के सात छोटी छोटी डलिया पर दम करें मतलूब को जायज़ मुहब्बत के वास्ते किसी तौर से खिलायें. अगर एक डली भी खा लेवे तो शिफता व फरिफता होकर ताबेदार हो जायें. मगर ये ख्याल रहें कि नाजायज़ के लिए हरगिज न करें वरना खतरनाक साबित हो सकता है. ये अमल रात को पढ़ा जायेगा. पढ़ने के वक़्त आमिल सिला हुआ कपडा नहीं पहन सकता है. जगह पाक व साफ हो. सामने एक सफेद रकाबी रखे और इसमें गुलाब फूल रखे और नज़र इसी पर जमाये रखे.

दीगर बराऐ हुब

तरकीब ये है जोज़देन के किसी महीने कि पहली तारीख़ से शुरू करें इसका हिसाब यूनानी सन से  किया जायेगा और रोज़ाना 300 मर्तबा ये अमल 17 रोज़ तक पढ़े इन्शा अल्लाह मतलूब महरबान हो. तर्के हैवान व परहेज कि जरुरत नहीं बाद में नमाज़ इशा पढ़े.
अमल ये है-
   मुहब्बत के वास्ते लिखकर अव्वल सात रोज़ तक पत्थर के नीचे दाबे बाद में बाज़ू पर बांधे. नक़्श ये है-

नक़्श

दीगर

   नौचन्दी जुमेरा को सुबह को मुश्क ज़ाफ़रान से पान पर लिख कर पान को माशूक़ को खिलाये. मुहब्बत होगी.

नक़्श

बराऐ मुहब्बत जनं व शौहर

   जनं व शौहर नौशता ज़ेर ज़मीन दफ़न कन्द. बफजलीही तआला मक़सद हासिल शूद. नक़्श ई अस्त.
   ये दुआ पढ़कर अस्माये मुवक्किलों के किसी फरिफता करना चाहे तो चालीस मर्तबा किसी मीठी चीज़ पर दम करें और मतलूब को खिलायें फरिफता हो. मुजर्रब है.

अयजनं

इस नक़्श को जलाकर किसी चीज़ में मिलाकर खिलायें.

दीगर बराऐ हुब

सिर्फ जुमेरा व जुमा  को लिखें.

दीगर बराऐ हुब

   21 इक्कीस दाने सियाह मिर्च पर सात मर्तबा तालिब व मतलूब के नाम के साथ पढ़कर दम करें और आग में डाल दें.
लिखकर आग में डालें मतलूब हासिल हुए आज़मौदा है.

दीगर बराऐ हुब

इस नक़्श को लिखकर आपने पास रखें.

लिखकर हवा में लटका दें मतलूब बेकरार होकर मतीअ व फ़रमा बरदार होगा.

दीगर बराऐ हुब

बराऐ हुब व तसख़ीर

किसी खुशबू में पढ़कर देवें.

दीगर

   सूरे अलम नशरह सात मर्तबा नमक पर दम करके आग में डाल दें. इन्शा अल्लाह ज़ालिम व हाकिम सभी तसख़ीर होंगे.
हलवे पर इकतालीस मर्तबा पढ़कर खिलायें. शौहर वज़न में उलफ़त बढ़ेगी.
मिर्च पर सात मर्तबा तालिब व मतलूब के नाम के साथ पढ़कर दम करें और आग में दल दें.

दीगर

चूल्हे में दफ़न करें मगर आग हर वक़्त जलती रहें  ताकि गर्मी पहुँचती रहें.

दीगर

   41 दाने मिर्च पर हर मिर्च पर 41 बार पढ़कर आग में डालते जायें जब गोश्त के जलने कि खुशबु आये फ़ौरन छोड़ दिया जायें वरना महबूब मेर जायेगा. जायज़  मक़सद के लिए करना वरना खतरनाक साबित हो सकता है.

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